Friday, 26 February 2016


तुम बसंत संग आये हो, संग और भी रंग जो लाए हो 
गुलमोहर, गेंदा और लिली संग तुम टेसू का रंग लाये हो 
अमवा से  पहले आये हो कोयल को हकारो दे आये हो 
उन पीले पीले मंजर पर एक नया रंग तुम डाले हो 
उन गेहूं के छोटे लच्छों में, एक नयी गांठ तुम डाले हो 

शुभ नील गगन अब तेरा है, ये मातृ धारा अब तेरी है 
किलको, खेलो, जागो हे पुत्र, ये कर्मभूमि अब तेरी है 

अनपहुंचे शिखरों तक पहुँचो, उन्मुक्त गगन में तुम उड़ लो 
उस लक्ष्य का तुम आह्वान करो, एक नया इतिहास यहीं रच लो 

सुजीत (२० फरवरी २०१६)
 
Anpahunche shikhron tak pahuncho.. Unmukt gagan me tum ud lo..
Likho ek naya itihaas yaheen, Puree kar Maat pita kee aas yaheen..